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Khud se hi jazbaat chhipane – Arpit 5/5 (1)

खुद से ही ज़ज्बात छिपाने पड़े,
खत ज्यों ही उसके पुराने पढ़े!
बोझिल हुई जब यादें उसकी,
आँखों से फिर आँसूं बहाने पड़े!!

…… अर्पित

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