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मुमताज़ – मेरी Amanat 5/5 (1)

छिपी लबों पे बातें जो उन्हें राज़ ही रहने दो,
क़फ़न चेहरे से हटाओ ना, मुझे मुमताज़ ही रहने दो!
ज़ुबाँ कहेगी कुछ भी न, आँखें मेरी रो पड़ेंगी,
ना छलकाओ इनको अब, खुशमिजाज़ ही रहने दो!!

….. मेरी Amanat

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