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Khwab se sundar aur koi – Tara Pandey 5/5 (1)

ख़्वाब से सुंदर और कोई नहीं, 
हकीकत से गहरा और कोई नहीं! 
कल के जैसा दूर कोई नहीं, 
आज के जैसा बेहतर कोई नहीं!! 

……. तारा पांडेय “मुक्तांशा”

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