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Har aankh nashili – Gaurav Maheshwari No ratings yet.

हर आँख नशीली नहीं होती
जाम छलकाए वो निगाहें कुछ और होती हैं
हर लब का अहसास मदहोश नहीं करता
ज़हर को भी चूम कर अमृत बनाए उन होठों की अदाए कुछ और होती हैं
तेरे इश्क़ में वो बात नहीं है की मेरी कलम चले
नज़्में दिल पे छप जाए वो इश्क़ स्याही कुछ और होती है

……… Gaurav Maheshwari

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